Saturday, 13 April 2013

Jai Taran Taran

धन्य-धन्य वह सप्तमी जब गुरुवर ने जन्म लिया
आडंबर के तूफानोँ से सत्य धर्म को बचा लिया
अपनी ओजमयी वाणी से जन-जन को प्रेरित किया
और अपने अनुयायियोँ को सच्चा तारणपंथ दिया..
"तू स्वंय भगवान है" का संदेश सबको सुना दिया
और अपने ज्ञानबल से चौदह ग्रंथोँ की निधि को प्रगट किया..
महान पुण्योदय से हमने ऐसी शुद्द आमनाओँ को प्राप्त किया...
ऐसे अध्यात्म ज्ञानी,योगी, स्वानुभूति से संपन्न,शुद्द चैतन्यप्रकाश से आलोकित, छटवे-सातवे गुणस्थान मेँ आत्मा के अतीन्द्रिय रस का पान करने वाले व स्वंय तरे और दूसरोँ को भवसागर से तरने हेतु आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाले वीरश्री नंदन वीतरागी संत श्री तारण तरण स्वामीजी महाराज के चरणोँ मेँ कोटि-कोटि वंदन व सर्मपण..

वन्दे श्री गुरु तारणम,,

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